“यह हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश है”: शहीद टीआई दिलीप पुरी के पैतृक गांव बरमंडल में गमगीन माहौल, परिजनों ने की फांसी की मांग
"यह हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश है": शहीद टीआई दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर पहुँचेगा पैतृक गांव बरमंडल, परिजनों ने की आरोपी को फांसी देने की मांग
धार/देवास (मध्य प्रदेश): देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कर्तव्य पथ पर जान गंवाने वाले थाना प्रभारी दिलीप पुरी की शहादत से पूरे प्रदेश और उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मूल रूप से धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरमंडल के रहने वाले टीआई दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर उनके गृह ग्राम लाया जा रहा है। बेटे की शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
💔 नवरात्रि में घर आए थे दिलीप, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
परिजनों ने भावुक होते हुए बताया कि शहीद दिलीप पुरी हाल ही में नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान पहली बार घर आए थे। परिवार को उनसे भविष्य को लेकर बहुत सी उम्मीदें थीं, लेकिन इस हृदयविदारक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
परिजनों का साफ तौर पर आरोप है कि यह महज़ एक साधारण सड़क हादसा नहीं, बल्कि शराब माफियाओं द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। परिवार ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस घटना के मुख्य आरोपी के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई की जाए और उसे फांसी की सजा दी जाए।
🗣️ परिजनों और करीबियों के बयान:
बहन दीपिका गोस्वामी का दर्द: मृतक टीआई की बहन दीपिका गोस्वामी ने रोते हुए कहा कि सरकार आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे और उसे फांसी के फंदे तक पहुँचाए। उन्होंने बताया कि घर में अकेले दिलीप ही कमाने वाले थे, जिनकी अचानक हुई इस शहादत से पूरे परिवार के सामने भरण-पोषण और भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। परिवार ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है।
दोस्त पंकज विश्वकर्मा की प्रतिक्रिया: मृतक के दोस्त पंकज विश्वकर्मा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को साजिश के तहत निशाना बनाया गया है। दोस्तों और सहकर्मियों में भी इस घटना को लेकर भारी रोष है।
पिता ओमप्रकाश पुरी की पीड़ा: शहीद टीआई के पिता ओमप्रकाश पुरी ने अपने बेटे को खोने के गम में टूटते हुए न्याय की मांग की है। एक पिता के लिए अपने जवान बेटे की ऐसी विदाई देखना सबसे बड़ा असहनीय दर्द है।




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