स्व-सहायता समूह से जुड़कर राजश्री दीदी ने सिलाई सेंटर स्थापित किया और 10 महिलाओं को रोजगार दिया।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर राजश्री दीदी ने संवारा आत्मनिर्भरता का सफर, 10 महिलाओं को दिया रोजगार
धार, 24 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहीं महिलाओं की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी निसरपुर जनपद के ग्राम कड़माल निवासी राजश्री पाटीदार की है, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्र में राजश्री दीदी के नाम से जाना जाता है।
राजश्री पाटीदार के लिए स्व-सहायता समूह से जुड़ना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ। शिक्षा पूरी करने के बाद वे सामान्य गृहिणी के रूप में जीवन बिता रही थीं। वर्ष 2021 में उन्होंने अग्रसर आजीविका स्व-सहायता समूह का गठन किया और गांव की महिलाओं के साथ बचत गतिविधियों की शुरुआत की।
प्रशिक्षण से हुनर को मिला नया रास्ता
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद राजश्री दीदी ने आर-सेटी धार से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सिलाई के क्षेत्र में अपने कौशल को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने वर्ष 2025-26 में आईटीआई भी उत्तीर्ण की।
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। सुबह 3 बजे उठकर घर के काम पूरे करने के बाद दिनभर प्रशिक्षण लेना उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाता है।
राजश्री दीदी ने अपने गांव की 35 महिलाओं को भी एकजुट किया और उनके लिए जूट उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण आयोजित करवाया। इस पहल के माध्यम से उन्होंने स्वयं के साथ अन्य महिलाओं को भी आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया।
उद्यम क्रांति योजना से मिला कारोबार को विस्तार
अपने सिलाई व्यवसाय को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए राजश्री दीदी ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण प्राप्त किया। वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपने घर पर 11 सिलाई मशीनों का पूरा सेटअप स्थापित किया।
सिलाई सेंटर शुरू होने के बाद अब वे स्वयं के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। वर्तमान में उनके सिलाई सेंटर के माध्यम से 10 अन्य महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
दो महीने में 25 हजार रुपये की आय
राजश्री दीदी ने सिलाई सेंटर शुरू करने के शुरुआती दो महीनों में ही लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित की है। वे स्कूल यूनिफॉर्म और वन्य वस्त्रों की सिलाई जैसे बड़े ऑर्डर भी सफलतापूर्वक पूरे कर रही हैं।
हाल ही में शासकीय पोर्टल पर वेंडर के रूप में पंजीकरण होने के बाद अब वे सरकारी टेंडर लेने के लिए भी सक्षम हो गई हैं। इससे उनके सिलाई व्यवसाय को आगे बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।
आत्मनिर्भरता के साथ दूसरी महिलाओं को भी रोजगार
राजश्री दीदी का सफर बताता है कि प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता और स्वयं पर विश्वास के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं।
उन्होंने न केवल अपना सिलाई व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि 10 अन्य महिलाओं को भी प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया। इसके साथ ही गांव की 35 महिलाओं को जूट उत्पाद निर्माण के प्रशिक्षण से जोड़ने की पहल भी की।
राजश्री दीदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उद्यम क्रांति योजना महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनका यह सफर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए एक उदाहरण के रूप में सामने आया है।
रिपोर्टिंग: आनंद अग्निहोत्री




































































































