सरदारपुर में माही नदी तट पर किसानों का जल सत्याग्रह समाप्त; प्रशासनिक चर्चा के बाद 15 दिन के अल्टीमेटम पर स्थगित हुआ आंदोलन
सरदारपुर/धार (मध्य प्रदेश): क्षेत्र के किसानों के अधिकारों और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले माही नदी के तट पर चल रहा ‘जल सत्याग्रह’ शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद समाप्त हो गया। किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा है।
🌊 नदी में उतरकर जता रहे थे विरोध, अधिकारियों ने की लंबी चर्चा
सरदारपुर क्षेत्र में सिंचाई और पानी की समस्याओं को लेकर किसान पिछले कुछ दिनों से मुखर थे। माही नदी के ठंडे पानी में उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच शनिवार को सरदारपुर तहसीलदार प्रशस्ति सिंह जमरा और नर्मदा सिंचाई परियोजना के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी पहुंचे।
मौके पर प्राथमिक चर्चा के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम कार्यालय बुलाया गया, जहां प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के साथ लंबी बैठक हुई। बैठक में किसानों की मांगों पर बिंदुवार चर्चा के बाद आखिरकार जल सत्याग्रह को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
💧 फिलहाल केवल 66 गांवों को मिलेगा नर्मदा का पानी: जिलाध्यक्ष
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राकेश सोलंकी ने वार्ता का विवरण साझा करते हुए बताया कि नर्मदा सिंचाई परियोजना के अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान चरण में परियोजना का पानी केवल 66 गांवों के किसानों को ही मिल सकेगा, तथा शेष वंचित गांवों के लिए फिलहाल विभाग के पास कोई सक्रिय योजना नहीं है। इस वास्तविक स्थिति को देखते हुए जिलाध्यक्ष सोलंकी ने क्षेत्र के सभी किसानों से अपील की है कि वे जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही अपनी आगामी फसलों की बोवनी की योजना बनाएं, ताकि भविष्य में पानी की कमी के कारण किसी आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
⏳ जिला सूखा घोषित करने की मांग पर 15 दिन का समय
वार्ता के दौरान किसान यूनियन ने धार जिले को तत्काल ‘सूखाग्रस्त’ (Drought-hit) घोषित करने की मांग प्रमुखता से रखी। इस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उच्च स्तर पर वस्तुस्थिति से अवगत कराने और नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 दिनों का समय मांगा है।
यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर जिले को सूखा घोषित नहीं किया गया और किसानों को अन्य मामलों में ठोस राहत नहीं मिली, तो किसान यूनियन पुनः व्यापक स्तर पर उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।




































































































