अमझेरा डोल ग्यारस में दिखी आस्था और परंपरा की अनूठी तस्वीर
अमझेरा की डोल ग्यारस में दिखी आस्था और परंपरा की अनूठी तस्वीर, पंडित छोटू शास्त्री ने लिया आयोजन में हिस्सा
अमझेरा। अमझेरा की प्रसिद्ध डोल ग्यारस में शामिल होना पंडित छोटू शास्त्री के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और अपनी मिट्टी से जुड़ने का भावुक अनुभव रहा। चिलचिलाती धूप के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के बेवान को खींचते श्रद्धालुओं की आस्था और अखाड़ों में शौर्य का प्रदर्शन करते पहलवानों का उत्साह आयोजन को खास बना रहा था।
डोल ग्यारस के दौरान अमझेरा का बस स्टैंड श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा नजर आया। भगवान के बेवान के प्रति लोगों की आस्था और अखाड़ों में पहलवानों के प्रदर्शन ने धार्मिक उत्सव के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति की भी झलक प्रस्तुत की।
अमझेरा की डोल ग्यारस बनी आस्था और परंपरा का संगम
पंडित छोटू शास्त्री ने अमझेरा की डोल ग्यारस के अनुभव को श्रद्धा और परंपरा से जुड़ा बताया। उनके अनुसार, डोल ग्यारस में भगवान के बेवान के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और अखाड़ों में पहलवानों का शौर्य इस आयोजन को विशेष बनाता है।
चिलचिलाती धूप में भी श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ बेवान को खींचते नजर आए। वहीं अखाड़ों में पहलवानों ने अपने शौर्य और कौशल का प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं की मौजूदगी और अखाड़ों की गतिविधियों से पूरा वातावरण उत्साह से भरा रहा।
अमझेरा की डोल ग्यारस अब बड़े धार्मिक आयोजन का स्वरूप ले चुकी है। यहां भगवान के बेवान में श्रद्धा, अखाड़ों के प्रदर्शन में साहस और पूरी परंपरा में अपनी मिट्टी से जुड़ाव की तस्वीर दिखाई देती है।
पहलवानों और खलीफाओं का किया सम्मान
डोल ग्यारस के अवसर पर अखाड़ों के पहलवानों और खलीफाओं के सम्मान का भी अवसर मिला। पंडित छोटू शास्त्री ने पहलवानों और खलीफाओं को प्रतीक चिन्ह, रुपटा और मोती की माला पहनाकर सम्मानित किया।
यह सम्मान अखाड़ों की परंपरा और उसमें योगदान देने वाले पहलवानों के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक अखाड़ों की संस्कृति भी दिखाई दी।
पत्रकार साथियों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर अमझेरा प्रेस क्लब के पत्रकार साथी भी मौजूद रहे। इनमें मुकेश राठौड़, जीवन चौहान, विक्रम राठौर, अभिजीत पंडित, गोपाल खंडेलवाल, फिरोज खान, रोहित राठौड़, अंशुल राठौड़, निलेश परमार, रहीस शेख, कमलेश राठौर और राकेश जैन सहित अन्य पत्रकार साथी शामिल रहे।
अमझेरा की डोल ग्यारस का यह आयोजन श्रद्धा, परंपरा, अखाड़ों के शौर्य और सामाजिक सहभागिता की अनूठी तस्वीर पेश करता नजर आया। पंडित छोटू शास्त्री के लिए भी यह अनुभव लंबे समय तक स्मृतियों में रहने वाला रहा।
रिपोर्टिंग: आनंद अग्निहोत्री




































































































