लेबड़-नयागांव फोरलेन: टोल वसूली लागत से पांच गुना पार, फिर भी सुरक्षा के इंतजाम अब तक अधूरे
लेबड़-नयागांव फोरलेन: टोल वसूली लागत से पांच गुना पार, फिर भी सुरक्षा के इंतजाम अब तक अधूरे
बदनावर/धार ( रिपोर्ट – पुरुषोत्तम शर्मा): क्या सड़क पर सफर करने के लिए टोल चुकाना सुरक्षित सफर की पूरी गारंटी देता है? लेबड़-नयागांव फोरलेन के आंकड़े इस सवाल को बेहद गंभीर बना देते हैं। करीब 1,015 करोड़ रुपये की शुरुआती निर्माण लागत वाले इस मार्ग पर अब तक 5,011 करोड़ रुपये से अधिक का टोल वसूला जा चुका है। इसके बावजूद, बोराली टोल प्लाजा से रोज करीब 22 हजार वाहनों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर सुरक्षा संकेतक, गड्ढे और खतरनाक कट आज भी वाहन चालकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। वर्ष 2008-09 में बना यह मार्ग करीब 17 साल बाद भी संधारण और सुरक्षा के भारी सवालों से घिरा हुआ है।
🛣️ 252 किमी का सफर, टोल से बचने की कोई गुंजाइश नहीं
लेबड़ से जावरा तक 124.15 किलोमीटर और जावरा से नयागांव तक 127.81 किलोमीटर लंबा यह मार्ग कुल 251.96 किलोमीटर के दायरे में फैला है। वर्ष 2008-09 में मेसर्स वेस्टर्न एमपी इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्रालि, मुंबई द्वारा पीपीपी-बीओटी मॉडल पर इस सड़क का निर्माण किया गया था।
इस मार्ग के बोराली टोल प्लाजा से 24 घंटे में लगभग 22 हजार वाहन गुजरते हैं। इतनी भारी आवाजाही वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सुगम और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है।
💰 लागत से पांच गुना वसूली, और 2038 तक बढ़ाई गई अवधि
लेबड़-नयागांव फोरलेन मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा टोल संग्रह करने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लेबड़-जावरा हिस्से की शुरुआती लागत करीब 589 से 605 करोड़ रुपये और जावरा-नयागांव हिस्से की लगभग 450 करोड़ रुपये थी (संयुक्त लागत करीब 1,015 से 1,060 करोड़ रुपये)। इसके मुकाबले अब तक 5,011 करोड़ रुपये से अधिक की टोल वसूली सामने आ चुकी है।
मूल लागत से कई गुना अधिक वसूली होने के बाद भी टोल वसूली की अवधि को वर्ष 2038 तक बढ़ाए जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इसके पीछे संशोधित लागत, ब्याज और रखरखाव का हवाला दिया जाता है, लेकिन इसे लेकर विवाद और कानूनी कार्रवाई भी जारी है।
| मार्ग (फोरलेन का हिस्सा) | टोल वसूली का आंकड़ा | अपडेट अवधि |
| लेबड़ से जावरा | 2,182.80 करोड़ रुपये | जून 2025 तक की आधिकारिक रिपोर्ट |
| लेबड़ से जावरा (अनुमानित) | 2,200 करोड़ रुपये से अधिक | सितंबर 2026 तक (हाईकोर्ट याचिका के संदर्भ में) |
| जावरा से नयागांव | 2,450.02 करोड़ रुपये | जून 2025 तक की विभागीय रिपोर्ट |
⚠️ हरियाली गायब, अधूरे सुरक्षा इंतजाम और हादसों का खतरा
इस फोरलेन पर कई जगहों पर सड़क की मरम्मत, समतलीकरण और गड्ढों को लेकर लगातार शिकायतें बनी हुई हैं।
सुरक्षा संकेतकों का अभाव: दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्थायी सुधार, पर्याप्त संकेतक और डिवाइडर के खतरनाक कटों पर नियंत्रण की सख्त जरूरत है।
रोशनी से बचाव की कमी: सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी से बचाव के लिए डिवाइडर के बीच पर्याप्त हरित अवरोध (ग्रीन बेल्ट) नदारद हैं।
वृक्षारोपण का अभाव: अनुबंध में वृक्षारोपण का प्रावधान होने के बावजूद हरियाली विकसित नहीं हो पाई है। पूर्व में धार कलेक्टर के आदेश के बावजूद इसके पालन में लापरवाही बरती गई है।
यात्री प्रतीक्षालय बदहाल: ग्रामीण इलाकों के पास बने यात्री प्रतीक्षालयों की उपयोगिता और रखरखाव पर भी बड़े सवाल हैं।
⚰️ हादसों की कीमत कौन चुकाएगा?
महज इसी माह (अक्टूबर) में अब तक इस मार्ग पर सड़क हादसों में छह लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। सवाल सिर्फ टोल की कमाई का नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन की सुरक्षा का है। जब टोल वसूली की अवधि 2038 तक बढ़ाई जा रही है, तो सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा सुधार की जवाबदेही भी उतनी ही सख्ती से तय होनी चाहिए।




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