बदनवार के वीर सपूत एवं सेवानिवृत्त सैनिक शांतिलाल मालवीय को नम आंखों और सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बदनवार के वीर सपूत को नम आँखों से अंतिम विदाई: सेवानिवृत्त सैनिक शांतिलाल मालवीय तिरंगे और सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन
बदनवार/धार (मध्य प्रदेश): भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जवान और अनुशासित व्यक्तित्व के धनी शांतिलाल मालवीय (इंदौर वाले) के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बदनवार तहसील के ग्राम बैगंदा के इस वीर सपूत को तिरंगे में लपेटकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। देशभक्ति के गूंजते गीतों के बीच निकली उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाजजन, परिजन और दूर-दूर से आए शुभचिंतक शामिल हुए।
🎖️ राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन
स्वर्गीय शांतिलाल मालवीय ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित मिलिट्री इंजीनियरिंग कोर में अपनी सेवाएं देकर देश की रक्षा में अहम योगदान दिया था। सेना से सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने मध्यप्रदेश वित्त विकास निगम, इंदौर में वाहन चालक के रूप में निष्ठावान सेवाएं दीं और वहां से भी सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। अपने पूरे सेवाकाल में उन्होंने अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की।
सरकारी सेवाओं से निवृत्त होने के बाद उन्होंने इंदौर जैसे महानगर के सुखद जीवन को छोड़कर अपने पैतृक गांव बदनवार तहसील के बैगंदा गाँव में परिवार के साथ रहना चुना। उन्होंने अपने बच्चों को भी उच्च शिक्षा और उत्कृष्ट संस्कार प्रदान किए; उनकी पुत्री एक योग्य चिकित्सक (डॉक्टर) हैं, और दोनों पुत्रों ने भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
🕊️ गमगीन माहौल में नम आँखों से दी विदाई
ग्राम बैगंदा स्थित निज निवास से प्रातः 11 बजे उनकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई। पार्थिव शरीर पर तिरंगा झंडा सुशोभित था और पृष्ठभूमि में बज रहे देशभक्ति के गीतों ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
वे स्वर्गीय राधेश्याम जी के छोटे भाई, स्वर्गीय बंस्तीलाल व आनंदीलाल के बड़े भाई तथा ओमप्रकाश, महेश एवं उपेंद्र (बबलू) मालवीय के पूज्य पिता जी थे। अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने उनके राष्ट्रप्रेम, मिलनसार स्वभाव और असाधारण जीवन के प्रति अपनी गहरी आत्मीयता व श्रद्धांजलि अर्पित की।




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