बदनावर: धर्मनिष्ठ श्रावक रतनलाल व्होरा के निधन पर परिवार ने करवाया नेत्रदान, दो लोगों को मिला जीवन का नया प्रकाश
धर्मनिष्ठ श्रावक रतनलाल व्होरा के निधन पर परिवारजन ने करवाया नेत्रदान: अंधत्व पर विजय के प्रयास में बने सहयोगी, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
बदनावर/धार (मध्य प्रदेश): जो व्यक्ति परोपकार की भावना रखते हैं, वे जीवन जीते समय तो अपने पलों को सार्थक करते ही हैं, लेकिन कुछ लोग मरणोपरांत भी समाज के लिए मिसाल बन जाते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायी प्रसंग बदनावर में देखने को मिला, जहाँ जैन समाज के वरिष्ठ एवं निःस्वार्थ भाव से समर्पित रहने वाले रतनलाल व्होरा (मुल्थान वाले) के निधन के बाद उनके परिवारजनों ने उनकी प्रेरणा के अनुरूप नेत्रदान करवाकर दो जरूरतमंदों को दुनिया देखने की रोशनी प्रदान की है।
🕊️ नियमित धर्माराधना और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे रतनलाल व्होरा
मूलतः मुल्थान निवासी और बदनावर के कचहरी चौक (पुरानी कोर्ट गली) निवासी 76 वर्षीय रतनलाल व्होरा का 26 अक्टूबर को निधन हो गया। वे कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। वे संघ और समाज में पूरी तरह सक्रिय, मिलनसार और मृदुभाषी स्वभाव के थे। प्रतिदिन नियमित रूप से धर्म-आराधना करना उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा था।
वे विपिन व्होरा व विलास व्होरा के पिताजी, स्वर्गीय तखतमल, मांगीलाल व हीरालाल जैन (एडवोकेट) के भाई तथा कैलाशचंद्र, मनोहरलाल, सतीश, दिलीप, देवेंद्र (वीरू सेठ), संजय, अरविंद और निलेश व्होरा के काका थे। उनकी अंतिम यात्रा कचहरी चौक से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नागेश्वर मुक्तिधाम पहुँची। अंतिम यात्रा में जैन समाज के अलावा विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
नागेश्वर मुक्तिधाम पर श्री व्होरा के दोनों पुत्रों और तीनों पौत्रियों ने उन्हें नम आँखों से मुखाग्नि दी। मुक्तिधाम पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में एडवोकेट अशोक संघवी, हीरालाल गुगलिया, मनोज सोमानी आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। सभा का संचालन सरपंच देवेंद्र मोदी ने किया।
👁️ परिवार की सहमति से हुआ 1026वां नेत्रदान
निधन के उपरांत परिवारजन ने पूरी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सेवाभावी निलेश जैन की सूचना पर गीता भवन न्यास समिति बड़नगर के नेत्रदान-देहदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल एवं उनकी टीम से संपर्क किया।
न्यास अध्यक्ष हरिकिशन मेलवानी ने जानकारी दी कि अंधत्व निवारण की इस श्रृंखला में यह 1026वां नेत्रदान रहा। “नेत्रों के दो मोती, दो आंखों की ज्योति” के स्लोगन को चरितार्थ करते हुए व्होरा परिवार ने अंतिम समय में भी पुण्य अर्जित किया। नेत्रदान के माध्यम से दो व्यक्तियों को रोशनी का अमूल्य उपहार मिला है।
बड़नगर की गीता भवन न्यास समिति और जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप सहित विभिन्न समाजों ने इस अनुकरणीय और प्रेरणादायी पहल के लिए व्होरा परिवार के प्रति आभार जताते हुए साधुवाद प्रेषित किया है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो जरूरतमंदों की जिंदगी में उजाला लौटता है, और यह कदम समाज में एक बड़ी मिसाल बन गया है।




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