कोद-कोटेश्वर मार्ग की बदहाली और 1582 वर्ष पुराना मेला: जनपद पंचायत की सुस्ती से श्रद्धालुओं की राह होगी मुश्किल
1582 वर्ष पुरानी परंपरा के 'कोटेश्वर कार्तिक मेले' पर तैयारियों की सुस्ती: एक माह से कम समय शेष, जनपद पंचायत की उदासीनता से श्रद्धालुओं की राह होगी मुश्किल
कोद/बदनावर/धार (मध्य प्रदेश): मालवा अंचल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संवाहक कोटेश्वर महादेव धाम का ऐतिहासिक कार्तिक मेला इस बार प्रशासनिक उदासीनता का शिकार होता नजर आ रहा है। 1582 वर्षों से अधिक पुरानी समृद्ध परंपरा को समेटे इस मेले के आयोजन में अब एक माह से भी कम का समय शेष बचा है, लेकिन आयोजक जनपद पंचायत बदनावर की ओर से तैयारियों को लेकर धरातल पर अब तक कोई खास हलचल दिखाई नहीं दे रही है।
कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ आस्था का भारी सैलाब उमड़ता है। दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु भगवान कोटेश्वर के दर्शन और पवित्र कुंड में दीपदान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन ग्राम कोद से होकर जाने वाली जर्जर सड़कों और अव्यवस्थित दुकानों के कारण इस बार श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
🕳️ कोद-कोटेश्वर-भैंसोला जर्जर मार्ग बना दुर्घटनाओं का सबब
मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोद-कोटेश्वर-भैंसोला मार्ग की बदहाली सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्राम कोद से कोटेश्वर धाम को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर जगह-जगह से उखड़ चुका डामर और बढ़ते गड्ढे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। मेले के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों और पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। समय रहते इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो आवागमन बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ जाएगा।
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