धार शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम, पं. विष्णु नारायण भातखंडे, शास्त्रीय गायन, सितार वादन, सेवा संकल्प अभियान, संगीत महाविद्यालय धार
भातखंडे स्मृति संगीत प्रसंग में शास्त्रीय गायन और सितार वादन ने बांधा समां
धार, 20 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संस्कृति संचालनालय, भोपाल और शासकीय संगीत महाविद्यालय, धार के संयुक्त तत्वावधान में भातखंडे स्मृति संगीत प्रसंग का आयोजन किया गया। 19 सितंबर को शासकीय ललित कला महाविद्यालय, धार के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन और सितार वादन की प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संगीत की विभिन्न शैलियों और रागों की खूबसूरती सामने आई।
भातखंडे स्मृति संगीत प्रसंग का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जयंत जोशी, विशिष्ट अतिथि लक्ष्मीकांत जोशी, विशेष अतिथि भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष निलेश भारती, जसप्रीत डंग, जनभागीदारी अध्यक्ष दीपक खलतकर और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया ने पं. विष्णु नारायण भातखंडे के चित्र पर माल्यार्पण, सरस्वती पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ किया।
इसके बाद महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सभी अतिथियों का स्वागत और सम्मान प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया ने शाल और श्रीफल भेंट कर किया। स्वागत उद्बोधन डॉ. देशराज वशिष्ठ ने दिया।
डॉ. अरुण धर्माधिकारी के शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
संगीत प्रसंग की मुख्य प्रस्तुतियों की शुरुआत ग्वालियर से आमंत्रित शास्त्रीय गायक डॉ. अरुण धर्माधिकारी के गायन से हुई।
उन्होंने विलंबित एकताल में राग केदार की रचना “बहुत गई, थोड़ी रह गई इस जग में” को सुर और लय के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद मध्यलय तीनताल में राग केदार की रचना “कान्हा रे नंद नंदन” प्रस्तुत की गई।
इसके बाद पं. विशाल कशालकर की रचना “लागी लागी प्रीत अब तुमसे कैसे कटे” प्रस्तुत हुई। राग मालकौंस में “पिया संग लरी पछतानी रे”, राग सोहनी और खमाज में ठुमरी तथा तराना की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत की विविधता को सामने रखा।
गायन की अंतिम प्रस्तुति “बाजे रे मुरलिया बाजे” भजन की रही।
गायन में तबले पर पवन माहोर, हारमोनियम पर डॉ. देशराज वशिष्ठ, वायलिन पर राघव वशिष्ठ तथा तानपुरे पर कोशी राठौर और यशस्विनी मुरमकर ने संगत की।
मनोज बावरा के सितार वादन ने मोहा मन
कार्यक्रम की अगली प्रमुख प्रस्तुति इंदौर के युवा सितार वादक मनोज बावरा की रही। उन्होंने सितार वादन की शुरुआत राग यमन के आलाप से की।
इसके बाद झपताल में मध्यलय की गत प्रस्तुत की गई। द्रुत लय में जोड़ और झाला की प्रस्तुति ने सभागार के वातावरण को संगीतमय बना दिया। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं ने तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
इसके बाद मिश्र राग में “एकला चलो रे” की धुन प्रस्तुत की गई, जिसने श्रोताओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। सितार वादन का समापन राग भैरवी की गत के साथ हुआ।
प्रस्तुति समाप्त होने पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सितार वादन में तबले पर यशपाल बावरा ने संगत की।
संगीत प्रेमियों और विद्यार्थियों ने लिया कार्यक्रम का आनंद
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ दोनों महाविद्यालयों के विद्यार्थी और संगीत प्रेमी मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रेम सिंह सिकरवार, भूपेंद्र सिंह चौहान, दुर्गेश बिरथरे, सौमत सिंह चिढ़ार, शशि चौधरी, रवीन्द्र डोडवे, पीयूष शर्मा, उदय राव कडूसकर, गोपाल और गिरधारी सहित महाविद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रिया शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया ने किया।
पं. विष्णु नारायण भातखंडे की स्मृति को समर्पित इस आयोजन में विद्यार्थियों, संगीत साधकों और संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न शैलियों और प्रस्तुतियों से रूबरू होने का अवसर मिला। आयोजन ने संगीत शिक्षा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण को और समृद्ध किया।




































































































