धार में संवेदनशील पुलिसिंग पर दो दिवसीय पुलिस प्रशिक्षण संपन्न! 🛡️✨

धार में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा रोकने, PWDVA, POCSO व BNS कानूनों की समझ बढ़ाने और संवेदनशील पुलिसिंग हेतु पुलिस विभाग व TRI का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न।

महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और संवेदनशील पुलिसिंग पर धार में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण संपन्न

धार (मध्य प्रदेश): महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा की प्रभावी रोकथाम, कानूनी प्रावधानों की गहरी समझ और पीड़ित-केंद्रित (Victim-Centric) पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से धार जिले में दो दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

‘ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन’ (TRI) द्वारा महिला सुरक्षा शाखा (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक कार्यालय धार के सभागार में संपन्न हुआ। इसमें जिले के सभी थानों से दो-दो चयनित पुलिस प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

👮 पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन, विशेषज्ञों ने दिए टिप्स

यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। सत्रों का संचालन TRI की विशेषज्ञ टीम—अधिवक्ता व जेंडर विशेषज्ञ सुश्री सुनीला सिंह, विधि विशेषज्ञ श्री बलवंत सिंह, सुश्री ईशा शांडिल्य, सुश्री पल्लवी जैन और सुश्री स्वाति प्रमार द्वारा किया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विजय डावर एवं सुश्री पारुल बेलपुरकर ने भी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के प्रति पुलिसकर्मियों को अत्यधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि पीड़ित निर्भीक होकर अपनी समस्या बता सकें।

⚖️ PWDVA, POCSO और BNS के कड़े प्रावधानों पर हुई गहन चर्चा

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को महिलाओं और बालकों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कानूनों की बारीकियाँ समझाई गईं:

  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (PWDVA)

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS)

  • लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act)

विशेषज्ञों ने बल देकर कहा कि हिंसा से प्रभावित मामलों में पुलिस की भूमिका केवल एफआईआर (FIR) दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित की बात गंभीरता से सुनना, उसकी सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का सम्मान करना भी अनिवार्य है।

🤝 पुलिस, SRLM और वन स्टॉप सेंटर के बीच तालमेल पर जोर

प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), लोक अधिकार केंद्र (LAK) और वन स्टॉप सेंटर (OSC) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। मनावर की समता सखी श्रीमती समोनती दीदी तथा TRI की श्रीमती गीता देवड़ा ने जमीनी स्तर पर महिलाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया।

सभी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल और समयबद्ध समन्वय बनाने पर सहमति बनी ताकि पीड़ितों को समय पर सुरक्षा, कानूनी सहायता और चिकित्सीय मदद उपलब्ध कराई जा सके।

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धार में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा रोकने, PWDVA, POCSO व BNS कानूनों की समझ बढ़ाने और संवेदनशील पुलिसिंग हेतु पुलिस विभाग व TRI का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न।

महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और संवेदनशील पुलिसिंग पर धार में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण संपन्न

धार (मध्य प्रदेश): महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा की प्रभावी रोकथाम, कानूनी प्रावधानों की गहरी समझ और पीड़ित-केंद्रित (Victim-Centric) पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से धार जिले में दो दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

‘ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन’ (TRI) द्वारा महिला सुरक्षा शाखा (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक कार्यालय धार के सभागार में संपन्न हुआ। इसमें जिले के सभी थानों से दो-दो चयनित पुलिस प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

👮 पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन, विशेषज्ञों ने दिए टिप्स

यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। सत्रों का संचालन TRI की विशेषज्ञ टीम—अधिवक्ता व जेंडर विशेषज्ञ सुश्री सुनीला सिंह, विधि विशेषज्ञ श्री बलवंत सिंह, सुश्री ईशा शांडिल्य, सुश्री पल्लवी जैन और सुश्री स्वाति प्रमार द्वारा किया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विजय डावर एवं सुश्री पारुल बेलपुरकर ने भी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के प्रति पुलिसकर्मियों को अत्यधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि पीड़ित निर्भीक होकर अपनी समस्या बता सकें।

⚖️ PWDVA, POCSO और BNS के कड़े प्रावधानों पर हुई गहन चर्चा

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को महिलाओं और बालकों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कानूनों की बारीकियाँ समझाई गईं:

  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (PWDVA)

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS)

  • लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act)

विशेषज्ञों ने बल देकर कहा कि हिंसा से प्रभावित मामलों में पुलिस की भूमिका केवल एफआईआर (FIR) दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित की बात गंभीरता से सुनना, उसकी सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का सम्मान करना भी अनिवार्य है।

🤝 पुलिस, SRLM और वन स्टॉप सेंटर के बीच तालमेल पर जोर

प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), लोक अधिकार केंद्र (LAK) और वन स्टॉप सेंटर (OSC) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। मनावर की समता सखी श्रीमती समोनती दीदी तथा TRI की श्रीमती गीता देवड़ा ने जमीनी स्तर पर महिलाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया।

सभी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल और समयबद्ध समन्वय बनाने पर सहमति बनी ताकि पीड़ितों को समय पर सुरक्षा, कानूनी सहायता और चिकित्सीय मदद उपलब्ध कराई जा सके।

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