धार में उमड़ा आस्था का सैलाब: कचहरी पिपलिया से दिग्तान वाली माता के दरबार तक निकली विशाल चुनरी यात्रा, हजारों भक्त हुए शामिल

धार में उमड़ा आस्था का सैलाब: कचहरी पिपलिया से दिग्तान वाली माता के दरबार तक निकली विशाल चुनरी यात्रा; हजारों श्रद्धालुओं ने की माता की आराधना

धार (मध्य प्रदेश): शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जिलेभर में मां भगवती की आराधना और भक्ति का माहौल चरम पर है। नवरात्रि के पांचवें दिन कचहरी पिपलिया से दिग्तान वाली माताजी के दरबार तक एक भव्य और विशाल चुनरी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु सिर पर कलश धारण कर और माता रानी के जयकारे लगाते हुए शामिल हुए, जिससे पूरा मार्ग पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

🚩 समंदर सिंह पटेल के नेतृत्व में निकली यात्रा, उमड़ी भारी भीड़

समंदर सिंह पटेल के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल चुनरी यात्रा में ग्रामीण क्षेत्रों और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भक्तों ने माता रानी के जयकारों के साथ मां को चुनरी अर्पित की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल तथा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

🛕 एक ही शिला पर विराजित हैं मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती

दिग्तान वाली माताजी के मंदिर के प्राचीन इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में बताते हुए पंडित चंचल कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि:

  • दिव्य स्वरूप: इस पावन धाम में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती एक ही शिला पर विराजित हैं, जो इसे अत्यंत दुर्लभ और जागृत स्थान बनाता है।

  • प्राचीन इतिहास: मान्यता है कि प्राचीन काल में माता की प्रतिमा उल्टी अवस्था में थी और उस स्थान पर धोबी कपड़े धोया करते थे। माता ने स्वप्न में संकेत देकर प्रतिमा को बाहर निकालने का मार्ग दिखाया, जिसके बाद प्रतिमा को प्रकट किया गया। इसके साथ ही काल भैरव, लाल भैरव, बटुक भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी प्रकट हुईं।

  • अद्भुत चमत्कार: पंडित चतुर्वेदी ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा जब प्रतिमा को अन्य स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया गया, तब प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई, जिसके बाद उनकी स्थापना वहीं की गई।

卍 मनोकामना पूर्ति के लिए बनता है उल्टा स्वस्तिक

दिग्तान वाली माताजी के दरबार में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह अवश्य पूर्ण होती है।

  • मनोकामना पूर्ति की कामना के लिए मंदिर में उल्टा स्वस्तिक बनाया जाता है।

  • मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा आकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा और भेंट अर्पित करते हैं।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में दिग्तान वाली माता के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।

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धार में उमड़ा आस्था का सैलाब: कचहरी पिपलिया से दिग्तान वाली माता के दरबार तक निकली विशाल चुनरी यात्रा; हजारों श्रद्धालुओं ने की माता की आराधना

धार (मध्य प्रदेश): शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जिलेभर में मां भगवती की आराधना और भक्ति का माहौल चरम पर है। नवरात्रि के पांचवें दिन कचहरी पिपलिया से दिग्तान वाली माताजी के दरबार तक एक भव्य और विशाल चुनरी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु सिर पर कलश धारण कर और माता रानी के जयकारे लगाते हुए शामिल हुए, जिससे पूरा मार्ग पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

🚩 समंदर सिंह पटेल के नेतृत्व में निकली यात्रा, उमड़ी भारी भीड़

समंदर सिंह पटेल के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल चुनरी यात्रा में ग्रामीण क्षेत्रों और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भक्तों ने माता रानी के जयकारों के साथ मां को चुनरी अर्पित की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल तथा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

🛕 एक ही शिला पर विराजित हैं मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती

दिग्तान वाली माताजी के मंदिर के प्राचीन इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में बताते हुए पंडित चंचल कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि:

  • दिव्य स्वरूप: इस पावन धाम में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती एक ही शिला पर विराजित हैं, जो इसे अत्यंत दुर्लभ और जागृत स्थान बनाता है।

  • प्राचीन इतिहास: मान्यता है कि प्राचीन काल में माता की प्रतिमा उल्टी अवस्था में थी और उस स्थान पर धोबी कपड़े धोया करते थे। माता ने स्वप्न में संकेत देकर प्रतिमा को बाहर निकालने का मार्ग दिखाया, जिसके बाद प्रतिमा को प्रकट किया गया। इसके साथ ही काल भैरव, लाल भैरव, बटुक भैरव और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी प्रकट हुईं।

  • अद्भुत चमत्कार: पंडित चतुर्वेदी ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा जब प्रतिमा को अन्य स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया गया, तब प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई, जिसके बाद उनकी स्थापना वहीं की गई।

卍 मनोकामना पूर्ति के लिए बनता है उल्टा स्वस्तिक

दिग्तान वाली माताजी के दरबार में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह अवश्य पूर्ण होती है।

  • मनोकामना पूर्ति की कामना के लिए मंदिर में उल्टा स्वस्तिक बनाया जाता है।

  • मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा आकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा और भेंट अर्पित करते हैं।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में दिग्तान वाली माता के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।

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