मेखालेश्वर पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा रवाना, 21 सितंबर को मंदिर शिखर पर चढ़ेगी

मेखालेश्वर पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा रवाना, बाबा रामदेवजी की आस्था से जुड़ी है परंपरा

बदनावर। बदनावर के समीप स्थित मेखालेश्वर धाम और राजस्थान के रामदेवरा के बीच बाबा रामदेवजी की भक्ति से जुड़ी एक धार्मिक परंपरा आज भी जारी है। इसी परंपरा के तहत शनिवार को मेखालेश्वर धाम से पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा के लिए रवाना की गई। यह ध्वजा 21 सितंबर को रामदेवरा के मुख्य मंदिर के शिखर पर चढ़ाई जाएगी।

लोकमान्यता के अनुसार बाबा रामदेवजी ने अपने मालवा प्रवास के दौरान विक्रम संवत 1412 में मेखालेश्वर धाम में चातुर्मास किया था। मान्यता है कि चार माह के इस प्रवास के दौरान उन्होंने यहां तपस्या की, धुनी रमाई और समाज में समानता एवं मानवता का संदेश दिया।

मेखालेश्वर पंचरंगी ध्वजा की धार्मिक परंपरा

बाबा रामदेवजी से जुड़ी इसी आस्था की परंपरा के तहत मेखालेश्वर धाम से रामदेवरा तक पंचरंगी ध्वजा पहुंचाने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को मेखालेश्वर धाम में ध्वजा का विधिवत पूजन और आरती की गई।

इसके बाद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री एवं धार-महू सांसद सावित्री ठाकुर ने पंचरंगी ध्वजा ग्रहण की और श्रद्धालुओं के साथ रामदेवरा के लिए रवाना हुईं।

ध्वजा रवाना होने के दौरान बाबा रामदेवजी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर मौजूद लोगों का पुष्पमालाओं और दुपट्टे पहनाकर स्वागत किया।

आरती और पूजन के बाद रवाना हुआ जत्था

मेखालेश्वर धाम पहुंचने पर महंत खटपटी नाथ महाराज और श्रद्धालुओं ने सावित्री ठाकुर का स्वागत किया। इसके बाद बाबा रामदेवजी की आरती की गई।

ध्वजा का विधिवत पूजन भी किया गया। पूजन और आरती के बाद सावित्री ठाकुर ने पंचरंगी ध्वजा ग्रहण की और श्रद्धालुओं के साथ रामदेवरा के लिए प्रस्थान किया।

ध्वजा यात्रा में करीब आठ सदस्य शामिल हैं। इनमें वरिष्ठ भाजपा नेता शेखर यादव, नगर पालिका एल्डरमैन कन्हैयालाल गुर्जर, महंत खटपटी नाथ महाराज सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हैं।

मेखालेश्वर से रामदेवरा तक आस्था की यात्रा

मेखालेश्वर से रवाना होने वाली पंचरंगी ध्वजा को बाबा रामदेवजी से जुड़ी आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। स्रोत के अनुसार, बाबा रामदेवजी के मालवा प्रवास की स्मृति के कारण मेखालेश्वर धाम मालवा क्षेत्र में उनकी भक्ति से जुड़े प्रमुख केंद्रों में माना जाता है।

राजस्थान के रूणीचा स्थित रामदेवरा में प्रतिवर्ष मेले का आयोजन होता है। इस दौरान देशभर से श्रद्धालु ध्वजाएं लेकर पहुंचते हैं। इनमें मेखालेश्वर धाम से जाने वाली पंचरंगी ध्वजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर मेखालेश्वर से पहुंचने वाली ध्वजा का पूजन करने के बाद उसे रामदेवरा मंदिर के शिखर पर चढ़ाया जाता है।

21 सितंबर को रामदेवरा मंदिर के शिखर पर चढ़ेगी ध्वजा

इस वर्ष रामदेवरा में 13 से 22 सितंबर तक मेला आयोजित हो रहा है। इसी क्रम में 21 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर मेखालेश्वर धाम से रवाना की गई पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा के मुख्य मंदिर के शिखर पर चढ़ाई जाएगी।

मेखालेश्वर से रामदेवरा तक ध्वजा पहुंचाने की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ दोनों क्षेत्रों के बीच जुड़ी परंपरा को भी सामने लाती है।

मालवा के श्रद्धालुओं के लिए मेखालेश्वर आस्था का केंद्र

मेखालेश्वर धाम के महंत खटपटी नाथ महाराज के अनुसार, राजस्थान के रूणीचा स्थित रामदेवरा नहीं पहुंच पाने वाले मालवा क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए मेखालेश्वर धाम बाबा रामदेवजी की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

यहां श्रद्धालु बाबा रामदेवजी के दर्शन करते हैं, मन्नत मांगते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

इस प्रकार मेखालेश्वर से रामदेवरा तक पहुंचने वाली पंचरंगी ध्वजा मालवा और राजस्थान के बीच बाबा रामदेवजी की भक्ति, इतिहास और आस्था से जुड़ी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

ध्वजा प्रस्थान के अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सोमानी, जिला उपाध्यक्ष प्रेमचंद परमार, नगर पालिका अध्यक्ष मीना यादव, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह पंवार, पार्षद अनीता चौहान, सुखराम देवड़ा, चेतन नागल, संतोष चौहान, भैरू डावर, जहांगीरलाल, सोहन पाटीदार और संतोष पाटीदार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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मेखालेश्वर पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा रवाना, बाबा रामदेवजी की आस्था से जुड़ी है परंपरा

बदनावर। बदनावर के समीप स्थित मेखालेश्वर धाम और राजस्थान के रामदेवरा के बीच बाबा रामदेवजी की भक्ति से जुड़ी एक धार्मिक परंपरा आज भी जारी है। इसी परंपरा के तहत शनिवार को मेखालेश्वर धाम से पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा के लिए रवाना की गई। यह ध्वजा 21 सितंबर को रामदेवरा के मुख्य मंदिर के शिखर पर चढ़ाई जाएगी।

लोकमान्यता के अनुसार बाबा रामदेवजी ने अपने मालवा प्रवास के दौरान विक्रम संवत 1412 में मेखालेश्वर धाम में चातुर्मास किया था। मान्यता है कि चार माह के इस प्रवास के दौरान उन्होंने यहां तपस्या की, धुनी रमाई और समाज में समानता एवं मानवता का संदेश दिया।

मेखालेश्वर पंचरंगी ध्वजा की धार्मिक परंपरा

बाबा रामदेवजी से जुड़ी इसी आस्था की परंपरा के तहत मेखालेश्वर धाम से रामदेवरा तक पंचरंगी ध्वजा पहुंचाने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को मेखालेश्वर धाम में ध्वजा का विधिवत पूजन और आरती की गई।

इसके बाद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री एवं धार-महू सांसद सावित्री ठाकुर ने पंचरंगी ध्वजा ग्रहण की और श्रद्धालुओं के साथ रामदेवरा के लिए रवाना हुईं।

ध्वजा रवाना होने के दौरान बाबा रामदेवजी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर मौजूद लोगों का पुष्पमालाओं और दुपट्टे पहनाकर स्वागत किया।

आरती और पूजन के बाद रवाना हुआ जत्था

मेखालेश्वर धाम पहुंचने पर महंत खटपटी नाथ महाराज और श्रद्धालुओं ने सावित्री ठाकुर का स्वागत किया। इसके बाद बाबा रामदेवजी की आरती की गई।

ध्वजा का विधिवत पूजन भी किया गया। पूजन और आरती के बाद सावित्री ठाकुर ने पंचरंगी ध्वजा ग्रहण की और श्रद्धालुओं के साथ रामदेवरा के लिए प्रस्थान किया।

ध्वजा यात्रा में करीब आठ सदस्य शामिल हैं। इनमें वरिष्ठ भाजपा नेता शेखर यादव, नगर पालिका एल्डरमैन कन्हैयालाल गुर्जर, महंत खटपटी नाथ महाराज सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हैं।

मेखालेश्वर से रामदेवरा तक आस्था की यात्रा

मेखालेश्वर से रवाना होने वाली पंचरंगी ध्वजा को बाबा रामदेवजी से जुड़ी आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। स्रोत के अनुसार, बाबा रामदेवजी के मालवा प्रवास की स्मृति के कारण मेखालेश्वर धाम मालवा क्षेत्र में उनकी भक्ति से जुड़े प्रमुख केंद्रों में माना जाता है।

राजस्थान के रूणीचा स्थित रामदेवरा में प्रतिवर्ष मेले का आयोजन होता है। इस दौरान देशभर से श्रद्धालु ध्वजाएं लेकर पहुंचते हैं। इनमें मेखालेश्वर धाम से जाने वाली पंचरंगी ध्वजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर मेखालेश्वर से पहुंचने वाली ध्वजा का पूजन करने के बाद उसे रामदेवरा मंदिर के शिखर पर चढ़ाया जाता है।

21 सितंबर को रामदेवरा मंदिर के शिखर पर चढ़ेगी ध्वजा

इस वर्ष रामदेवरा में 13 से 22 सितंबर तक मेला आयोजित हो रहा है। इसी क्रम में 21 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर मेखालेश्वर धाम से रवाना की गई पंचरंगी ध्वजा रामदेवरा के मुख्य मंदिर के शिखर पर चढ़ाई जाएगी।

मेखालेश्वर से रामदेवरा तक ध्वजा पहुंचाने की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ दोनों क्षेत्रों के बीच जुड़ी परंपरा को भी सामने लाती है।

मालवा के श्रद्धालुओं के लिए मेखालेश्वर आस्था का केंद्र

मेखालेश्वर धाम के महंत खटपटी नाथ महाराज के अनुसार, राजस्थान के रूणीचा स्थित रामदेवरा नहीं पहुंच पाने वाले मालवा क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए मेखालेश्वर धाम बाबा रामदेवजी की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

यहां श्रद्धालु बाबा रामदेवजी के दर्शन करते हैं, मन्नत मांगते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

इस प्रकार मेखालेश्वर से रामदेवरा तक पहुंचने वाली पंचरंगी ध्वजा मालवा और राजस्थान के बीच बाबा रामदेवजी की भक्ति, इतिहास और आस्था से जुड़ी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

ध्वजा प्रस्थान के अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सोमानी, जिला उपाध्यक्ष प्रेमचंद परमार, नगर पालिका अध्यक्ष मीना यादव, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह पंवार, पार्षद अनीता चौहान, सुखराम देवड़ा, चेतन नागल, संतोष चौहान, भैरू डावर, जहांगीरलाल, सोहन पाटीदार और संतोष पाटीदार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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