बदनावर में रातभर झिलमिलाती रहीं आस्था की झांकियां, शंकर सवारी में उमड़ा जनसैलाब

आठ भव्य झांकियों ने मोहा मन, पांच अखाड़ों के युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब; अलसुबह आरती के साथ हुआ शंकर सवारी का समापन

बदनावर में रातभर झिलमिलाती रहीं आस्था की झांकियां, शंकर सवारी में उमड़ा जनसैलाब

आठ झांकियां एक से बढ़कर एक; अलसुबह आरती के साथ हुआ समापन

बदनावर। भादव मास के दूसरे सोमवार की रात नगर की सड़कों पर आस्था, कला और रोमांच का अनूठा संगम नजर आया। नगर के तीन प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल अंतिम शंकर सवारी को देखने के लिए हजारों दर्शक रातभर डटे रहे। महाकाल मंडल के तत्वावधान में निकले चल समारोह में आठ भव्य झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। वहीं पांच अखाड़ों के युवाओं ने हैरतअंगेज शारीरिक करतब दिखाकर खूब तालियां बटोरीं।

फूलों से सजे रथ में विराजित भगवान शंकर के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। मंगलवार सुबह पांच बजे पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आरती के बाद सवारी का समापन हुआ।

आठ झांकियों में साकार हुए पौराणिक प्रसंग

महाकाल मंडल की झांकी में भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के विवाह का प्रसंग आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। दुर्गा मित्र मंडल ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर आधारित झांकी तैयार की। इसमें भगवान जगन्नाथ की भक्ति और रथयात्रा की परंपरा को भव्य रूप में प्रदर्शित किया गया।

वहीं सांवरिया ग्रुप की झांकी हनुमान अंश में नीम करोली बाबा पर बनाई गई, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। सरस्वती मित्र मंडल की झांकी में ताड़कासुर द्वारा नंदीजी को बंदी बनाने और भगवान शंकर के आदेश पर कार्तिकेय द्वारा ताड़कासुर के वध का प्रसंग साकार किया गया।

कप्तान मित्र मंडल ने ‘काल और महाकाल’ के प्रसंग को झांकी का रूप दिया। वहीं नवयुवक मंडल की झांकी में कैलाश पर्वत पर रावण द्वारा शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हुए दृश्य को जीवंत किया गया।

बाबा अमरनाथ भक्त मंडल की झांकी में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीला के आठ दृश्यों को प्रदर्शित किया गया। जबकि कष्ट भंजन ग्रुप ने लगातार दूसरे वर्ष आकर्षक झांकी प्रस्तुत करते हुए इस बार नरसिंह अवतार के प्रसंग को विषय बनाया।

दूर-दराज से पहुंचे लोग, रातभर चलता रहा कारवां

झांकियों की भव्यता का आकर्षण ऐसा रहा कि इन्हें देखने के साथ ही अपने नगरों में ले जाने के उद्देश्य से दूर-दराज के शहरों से विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ता भी बदनावर पहुंचे।

नगर की विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले दूसरे राज्यों के कर्मचारी भी सपरिवार शंकर सवारी देखने पहुंचे। इससे देर रात तक सड़कों पर लोगों की भीड़ बनी रही।

करीब पौन किलोमीटर लंबे चल समारोह में रात दो बजे तक जबरदस्त चहल-पहल रही। जैसे-जैसे झांकियां आगे बढ़तीं, सड़क के दोनों ओर खड़े लोग मोबाइल कैमरों में इन दृश्यों को कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में झांकियों को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।

फूलों से सजे रथ में निकले भगवान शंकर

शंकर सवारी का सबसे भावपूर्ण दृश्य फूलों से सजे रथ में विराजित भगवान शंकर का रहा। श्रद्धालु रथ के समीप पहुंचकर भगवान के दर्शन करते और कुछ देर तक उन्हें निहारते रहे।

रथ के साथ चल रहे भजनों और धार्मिक धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रथ के आगे-आगे न्यू संगम बैंड के 40 सदस्यीय दल ने भजनों की धुनों से वातावरण में भक्ति का रंग घोल दिया।

झांकियों की रोशनी, बैंड की धुन, जयकारों और अखाड़ों के करतबों के बीच रातभर बदनावर की सड़कें उत्सव के रंग में रंगी रहीं।

सेवा में भी आगे रहे भक्त मंडल

शंकर सवारी में शामिल श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। बैजनाथ भक्त मंडल की ओर से चलायमान ट्राले पर श्रद्धालुओं को निःशुल्क पोहा प्रसादी वितरित की गई।

वहीं श्री बैजनाथ महादेव उत्सव समिति की ओर से बस स्टैंड पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चाय की व्यवस्था की गई। समिति पिछले 11 वर्षों से शंकर सवारी के दौरान यह सेवा करती आ रही है।

पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद

नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से पर्याप्त पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया था। प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी भी शंकर सवारी के साथ चलते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।

भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस जवानों की विशेष तैनाती रही, जिससे चल समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

अलसुबह आरती के साथ हुआ समापन

रातभर चले भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के बाद मंगलवार सुबह करीब पांच बजे पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आरती की गई। आरती के साथ ही शंकर सवारी का विधिवत समापन हुआ।

शंकर सवारी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य झांकियों, अखाड़ों के करतब और धार्मिक आयोजनों ने बदनावर में आस्था और संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेर दी।

सांवरिया मित्र मंडल की नीम करोली बाबा पर आधारित झांकी ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

Facebook
WhatsApp
DharKiDhadkan 70%

आठ भव्य झांकियों ने मोहा मन, पांच अखाड़ों के युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब; अलसुबह आरती के साथ हुआ शंकर सवारी का समापन

बदनावर में रातभर झिलमिलाती रहीं आस्था की झांकियां, शंकर सवारी में उमड़ा जनसैलाब

आठ झांकियां एक से बढ़कर एक; अलसुबह आरती के साथ हुआ समापन

बदनावर। भादव मास के दूसरे सोमवार की रात नगर की सड़कों पर आस्था, कला और रोमांच का अनूठा संगम नजर आया। नगर के तीन प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल अंतिम शंकर सवारी को देखने के लिए हजारों दर्शक रातभर डटे रहे। महाकाल मंडल के तत्वावधान में निकले चल समारोह में आठ भव्य झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। वहीं पांच अखाड़ों के युवाओं ने हैरतअंगेज शारीरिक करतब दिखाकर खूब तालियां बटोरीं।

फूलों से सजे रथ में विराजित भगवान शंकर के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। मंगलवार सुबह पांच बजे पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आरती के बाद सवारी का समापन हुआ।

आठ झांकियों में साकार हुए पौराणिक प्रसंग

महाकाल मंडल की झांकी में भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के विवाह का प्रसंग आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। दुर्गा मित्र मंडल ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर आधारित झांकी तैयार की। इसमें भगवान जगन्नाथ की भक्ति और रथयात्रा की परंपरा को भव्य रूप में प्रदर्शित किया गया।

वहीं सांवरिया ग्रुप की झांकी हनुमान अंश में नीम करोली बाबा पर बनाई गई, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। सरस्वती मित्र मंडल की झांकी में ताड़कासुर द्वारा नंदीजी को बंदी बनाने और भगवान शंकर के आदेश पर कार्तिकेय द्वारा ताड़कासुर के वध का प्रसंग साकार किया गया।

कप्तान मित्र मंडल ने ‘काल और महाकाल’ के प्रसंग को झांकी का रूप दिया। वहीं नवयुवक मंडल की झांकी में कैलाश पर्वत पर रावण द्वारा शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हुए दृश्य को जीवंत किया गया।

बाबा अमरनाथ भक्त मंडल की झांकी में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीला के आठ दृश्यों को प्रदर्शित किया गया। जबकि कष्ट भंजन ग्रुप ने लगातार दूसरे वर्ष आकर्षक झांकी प्रस्तुत करते हुए इस बार नरसिंह अवतार के प्रसंग को विषय बनाया।

दूर-दराज से पहुंचे लोग, रातभर चलता रहा कारवां

झांकियों की भव्यता का आकर्षण ऐसा रहा कि इन्हें देखने के साथ ही अपने नगरों में ले जाने के उद्देश्य से दूर-दराज के शहरों से विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ता भी बदनावर पहुंचे।

नगर की विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले दूसरे राज्यों के कर्मचारी भी सपरिवार शंकर सवारी देखने पहुंचे। इससे देर रात तक सड़कों पर लोगों की भीड़ बनी रही।

करीब पौन किलोमीटर लंबे चल समारोह में रात दो बजे तक जबरदस्त चहल-पहल रही। जैसे-जैसे झांकियां आगे बढ़तीं, सड़क के दोनों ओर खड़े लोग मोबाइल कैमरों में इन दृश्यों को कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में झांकियों को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।

फूलों से सजे रथ में निकले भगवान शंकर

शंकर सवारी का सबसे भावपूर्ण दृश्य फूलों से सजे रथ में विराजित भगवान शंकर का रहा। श्रद्धालु रथ के समीप पहुंचकर भगवान के दर्शन करते और कुछ देर तक उन्हें निहारते रहे।

रथ के साथ चल रहे भजनों और धार्मिक धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रथ के आगे-आगे न्यू संगम बैंड के 40 सदस्यीय दल ने भजनों की धुनों से वातावरण में भक्ति का रंग घोल दिया।

झांकियों की रोशनी, बैंड की धुन, जयकारों और अखाड़ों के करतबों के बीच रातभर बदनावर की सड़कें उत्सव के रंग में रंगी रहीं।

सेवा में भी आगे रहे भक्त मंडल

शंकर सवारी में शामिल श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। बैजनाथ भक्त मंडल की ओर से चलायमान ट्राले पर श्रद्धालुओं को निःशुल्क पोहा प्रसादी वितरित की गई।

वहीं श्री बैजनाथ महादेव उत्सव समिति की ओर से बस स्टैंड पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चाय की व्यवस्था की गई। समिति पिछले 11 वर्षों से शंकर सवारी के दौरान यह सेवा करती आ रही है।

पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद

नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से पर्याप्त पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया था। प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी भी शंकर सवारी के साथ चलते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।

भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस जवानों की विशेष तैनाती रही, जिससे चल समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

अलसुबह आरती के साथ हुआ समापन

रातभर चले भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के बाद मंगलवार सुबह करीब पांच बजे पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आरती की गई। आरती के साथ ही शंकर सवारी का विधिवत समापन हुआ।

शंकर सवारी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य झांकियों, अखाड़ों के करतब और धार्मिक आयोजनों ने बदनावर में आस्था और संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेर दी।

सांवरिया मित्र मंडल की नीम करोली बाबा पर आधारित झांकी ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

Table of Contents

Related Posts

पीथमपुर में डायल-112 की सराहनीय पहल: घर से बिछड़ी 4 साल की बच्ची को सुरक्षित परिजनों को सौंपा

धार जिले के पीथमपुर में बीमा हॉस्पिटल के पास मिली बिछड़ी हुई मासूम बच्ची। डायल-112 FRV-17 टीम ने खोजबीन कर

Read More